ساختګی غاښونه ایخودل روا دی او که نه ؟

همت

ځواب

بسم الله الرحمن الرحيم

د مصنوعي يا ساختګي غاښونو ايښودل په اتفاق د فقهاؤ جايز دي .

و  فی  الدرالمختار:

«‌و  یتخذ  انفاً  منه  لأنّ  الفضّة  تنتنه‌»‌.

وفی  الرد:

«(‌قوله‌:  لأن  الفضّة  تنتنه‌)  الاولی  تنتن  بلا  ضمیر،  و اشار الی  الفـرق  للاما‌م  بین  شدّ  السنّ  و  اتخا‌ذ  الأنف‌،  فجوّز الأنف  من  الذ‌هب  لضرورة  نتن ‌الفضة‌،  لان  المحرّم  لایبا‌ح إلّا لضرورة‌.  (‌قوله‌:  و  جوزهما  محمد)‌ أ‌ی  جوّز الذهب  و الفضّة‌»‌. (رد المحتار: 5/255)

«‌و افتی  فی  خلاصة  الفتاوی بجواز اتخا‌ذ  السنّ  مـن  الذهب  و  الفضة‌»‌.(امداد المفتين: ص 982)

و  فی  الهندیة‌:

«‌قطعت  انملته  یجوز أن  یتخذها  من  ذهب  أو  فضّة‌»‌.(هنديه: 5/336)

«‌و ان  لم  یحش  اسنانه  بالمادة  الکـیمیاویة  وجـعت  اسـنانه  و  یتضرر و تکدر الحیاة علیه‌،  فلابأس بحشو الاسنا‌ن‌، فا‌ذا  فعل  ذلك صح غُسله بلا ریب‌،  لأنها  تأخذ  حکم  الاسنان الکـاملة‌، و دلیله  قوله  تعالی‌:  «‌و ان ‌کنتم  جُنُباً  فاطهروا»  فا‌نه امر  بتطهـیر  جمیع  البدن الّا  ما  تعذّر  ایصال  الماء  ا‌ليه  حقیقة أو  حکماً، للحرج‌»‌.(غنية المتملّي معروف بحاشية حلبي: ص 46)

و  قا‌ل  العلامه  ظفر احمد  العثما‌نی‌ رحمه الله‌:  امر  الله  سبحانه  و  تعالی  بالطهر  بضم  الهاء‌،  و  هو  تطهیر  جمیع  البدن  و اسم  البدن  یقع  عـلی  الظاهر  و البا‌طن  الا  أن  ما  یتعذر ایصال الماء الیه‌، خا‌رج  عن  قـضیة  النص‌،  و کذا  مع  یتعسّر،  لان ا‌لمتعسّر منفی ‌‌کالمتعذّر، ‌کدا‌خل العینین‌، فإنّ  فی  غسلهما  من  الحرج  مالا  یخفی»‌.(اعلاء السنن: 1/135)

و الله سبحانه وتعالی اعلم

آن لاين اسلامي لارښود

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